केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2019 तक बढ़ाने की मंजूरी दी- 

 

15वें वित्त आयोग:-


♦ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2019 तक बढ़ाने की स्वीकृति 17 जुलाई 2019 कोदे दी है। इससे वित्त आयोग सुधार कार्यक्रमों को देखते हुए वित्तीय अनुमानों के लिए विभिन्न तुलना योग्य अनुमानों पर विचार कर सकेगा। 

15वें वित्त आयोग गठन करने का उद्देश्य- 

♦केंद्र सरकार द्वारा पिछले 4 वर्षों में किए गए प्रमुख वित्तीय/बजट सुधारों को ध्यान में रखते हुए आयोग का गठन किया गया है। इन सुधारों में योजना आयोग को समाप्त करना और उसकी जगह नीति आयोग लाना, गैर योजना तथा योजना व्यय के बीच भेद को समाप्त करना, बजट कैलेंडर एक महीना आगे बढ़ाना और पहली फरवरी को नया वित्त वर्ष प्रारंभ होने से पहले पूर्ण बजट पारित करना, जुलाई 2017 से वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू करना, उधारी तथा वित्तीय घाटा उपाय के साथ नया एफआरबीएम ढांचा बनाना शामिल है।

 

♦आयोग का कार्य क्षेत्र उपरोक्त वित्तीय/ बजट सुधारों को ध्यान में रखता है। केंद्र तथा राज्य सरकारों की व्यय और प्राप्तियों के निर्धारण कार्य के आधार पर आयोग द्वारा सिफारिशें करने में समय लगेगा क्योंकि प्रारंभ से अंत तक डाटा की निरंतरता और डाटा सेटों की जांच चुनौतिपूर्ण हो जाती है।    

  

स्थापना- 

 

♦ भारतीय वित्त आयोग की स्थापना-1951

 

15वें वित्त आयोग के बारे में:- 

 

♦ आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच साल में होता है.  वित्त आयोग एक अर्द्धन्यायिक एवं सलाहकारी निकाय है। 

♦ राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 280 की धारा (1) तथा वित्त आयोग (विविध प्रावधान) अधिनियम, 1951 का उपयोग करते हुए 27 नवम्बर, 2017 को 15वें आयोग का गठन किया। 

♦ आयोग को अपने कार्य क्षेत्र के आधार पर 1 अप्रैल, 2020 से प्रारंभ 5 वर्षों की अवधि के लिए 30 अक्टूबर, 2019 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। 

♦ 15वें वित्त आयोग अध्यक्ष(वर्तमान)- एनके सिंह 

♦ 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 2020-25 तक होगा। 

♦ अभी तक 14 वित्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्तीय वर्ष 2019-20 तक के लिये वैध हैं। 

संरचना-संगठन- 

 

♦ अनुच्छेद 280(1) के तहत उपबंध है कि वित्त आयोग राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त्त किये जाने वाले एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा। 

 

♦ अनुच्छेद 280(2) के तहत संसद को शक्ति प्राप्त है कि वह वित्त आयोग की  निर्धारित करे। 

 

♦ संसद द्वारा वित्त आयोग के सदस्यों की अर्हताएँ निर्धारित करने हेतु वित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम,1951 पारित किया गया है इसके अंतर्गत निम्नलिखित अर्हताएँ हैं: 

 

♦ अध्यक्ष एक ऐसा व्यक्ति हो जो लोक मामलों का ज्ञाता हो। 

 

♦ अन्य चार सदस्यों में उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की अर्हता हो या उन्हें प्रशासन व वित्तीय मामलों का विशेष ज्ञान हो या अर्थशास्त्र का विशिष्ट ज्ञान हो। 



कार्य-

 ♦ आयोग केंद्र से राज्यों को मिलने वाले अनुदान के नियम भी तय करता है.आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के वित्त, घाटे, ऋण स्तर की स्थिति की समीक्षा करेगा. यह मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के लिए राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की व्यवस्था पर सुझाएगा. नया आयोग अन्य बातों के साथ साथ माल व सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के केंद्र व राज्यों की वित्तीय स्थिति पर असर का भी आकलन करेगा 

 

♦ शक्तियाँ-आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाता है। 

 

♦ प्रस्तुत सिफारिशों के साथ स्पष्टीकारक ज्ञापन भी रखवाना होता है ताकि प्रत्येक सिफारिश के संबंध में हुई कार्यवाही की जानकारी हो सके। 

 

♦ वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशें सलाहकारी प्रवृति की होती हैं इसे मानना या न मानना सरकार पर निर्भर करता है। 

 

♦ 15वें वित्त आयोग सदस्य-सरकार द्वारा अधिसूचना के अनुसार वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव शक्तिकांत दास, पूर्व मुख्य ​आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी, नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अनूप सिंह वित्त आयोग के सदस्य बनाए गए हैं 

 

प्रथम अध्यक्ष-


♦ प्रथम वित्त आयोग के अध्यक्ष के.सी. नियोगी थे।